गुरुवार, 18 जुलाई 2019

Secret Summaris

नजम ए खास

अपनी जान  के  दुश्मन को अपनी जान कहते है
मोहबत की इसी मिटी को हिंदुस्तान कहते है

सोमवार, 14 मई 2018

लोग कहते है समझो तो
खामोशिया भी बोलती है,

मेँ अरसे से खामोशी में हूँ वो
बरसो से बेखबर है |

तेरे उतारे हुए दिन पहन के अब भी मैं
तेरी महक में कई रोज काट देता हूँ |

कौन कहता है कि हम झूठ नहीं बोलते
एक बार खैरियत तो पूछ के देखिए |

जो कुछ भी हू यारो
गुनेहगर नहीं हु दरवाजा हूँ दहलीज हूँ |
दीवार नहीं हूँ


हे राम इतनी दया कर की
ये जीवन निरर्थक न जाय
ऐसा आप को चाहू संसार को भुला दू

मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

Government Servent {सरकारी कर्मचारी }

बड़ी मेहनत के बाद मैंने सरकारी नोकरी पायी है ,
नोकरी में आया तो जाना , यहाँ एक तरफ कुआँ  है तो दूसरी तरफ़ खाई है ॥
जहा कदम कदम पर जिल्लत और घडी-घडी पर ताने  है ,
यहाँ पर  मुझे अपनी ज़िन्दगी के कई साल बिताने है ।
अपनी गलती ना हो लेकिन क्षमा याचना हेतु हाथ फैलाने है ,
फिर भी बात-बात पर चार्जशीट और punishment ही पाने है ॥
जानता हू ये अग्निपथ है फिर भी मैं चलने वाला हूँ ,
क्योकि मैं सरकारी नोकरी वाला हूँ ॥
जहाँ एक तरफ मुझे प्रशासन की , और दूसरी तरफ पब्लिक की भी सुननी है ,
यानी मुझे दो में से एक नहीं ,बल्कि दोनों राह चुननी है ॥
ड्यूटी पर लेट हुयी तो अधिकारी और पब्लिक चिलाते है ,
गलती चाहे किसी की भी हो सजा तो हम ही पाते है ॥
दो नावो पर सवार हूँ फिर भी सफर पूरा करने वाला हूँ ,
क्योंकि में सरकारी नोकरी वाला हूँ ॥
आसान नहीं है सबको एक साथ खुश रख पाना,
परिवार के साथ वक्त बिताना, और Office में जॉब बचाना ॥
परिवार के साथ बमुश्किल कुछ वक्त बिता पाता हूँ ,
घर जैसे कोई मुसाफिर खाना हो , वहा तो सिर्फ आता और जाता हूँ ॥
फिर भी हर मोड़ पर में  अपनी जिम्मेदारी पूरी करने वाला हूँ ,
क्योंकि मै सरकारी नोकरी वाला हूँ ॥
प्रमोसन इन्क्रीमेंट की बात पर , हमें सालो लटकाया जाता है,
हक़ की बात करने पर ठेंगे दिखलाया जाता है ॥
ये एक लड़ाई है , इसमें सब को साथ लेकर चलने वाला हूँ ,
क्योंकि मै सरकारी नोकरी वाला हूँ ॥
देश समाज में सरकारी नोकरो के आरामपरस्त होने का बड़ा बवाल है ,
छुटी  मिली ना घर जा सके, Duty में ही दीवाली-ईद-क्रिश्मस मनाने का अजब कमाल है ॥
टिफिन से टिफिन जब मिलते है, तो एक नया जायका बन जाता है ,
खुद के बनाये खाने में ,और घर के खाने में फर्क साफ़ नजर आता है ॥
मज़बूरी ने इतना कुछ सिखाया ,आगे भी बहुत कुछ सीखने वाला हूं ,
क्योंकि मै सरकारी नोकरी वाला हूँ ॥
लोग समझते है बड़ा मज़ा करते है , सरकारी नोकरी में ,
अब उहे कौन समझाए कि सरकारी कर्मी के लिया सरकार के पास सिर्फ वादे है,
पब्लिक चाहे मनमानी करे, स्टाफ के लिये बड़े सख्त कायदे है ॥ 
सबको मै बदल नहीं सकता, इसलिये आब खुद को बदलने वाला हूँ ,
क्योंकि मै  सरकारी नोकरी करने वाला हूँ ॥ 





शनिवार, 19 सितंबर 2015

Maan ke Baat 20 September 2015

कहते है के लम्हे जितना क़म होता है प्यार उतना ही ज़्यादा होता है यदि मै और मेरा कोई अज़ीज दोस्त  कही अचानक भीड़ में मिल जाए तो ज्यादा खुशी होगी बजाय रोज मिलने पर  । तो जाहिर सी बात  है ज़्यादा मुलाकात अछी  नहीं है
आज तो कल से कुछ ज़्यादा की उम्मीद रख ली थी मैने जो इस कदर गवारा न था खुदा को
आज पीछै  देखता हु तो अपने आप को तकरीबन डेढ़ दो लाख के जमीनी कर्जे के नीचे अपने आप को पाता हु ।
और अपने आप मैं समय की घडी के चाल से मिलाना चाहता हु और सभी को यही कहता हु की में तुम सब को पीछे छोड़ दूंगा बजाय उन सभी के साथ चलने के |
अक्शर  दुनिया यही कहती है की " वफ़ा तो सिर्फ अपनो में होती है ". लेकिन मुझे तो लगा की " जितनी बेवफाई की बू मेरे अपनों में है शायद गैरो में कहा है " बफा तो सिर्फ हाथी के दांत की जैसी है वो तो सिर्फ दिखावट-दिखावट ही है
इस बनावटी दुनिया के दिखावटी लोगो से अक्शर अपने आप को दूर रखता हूँ इसी लिए तो पापा की पीढ़ी के लोगो के बीच में नहीं बोलता हूँ न जाने कोन वफ़ा के नाम पे  बेवफाई कर बैठे

























मन की बात 20 सितम्बर 2015