शनिवार, 19 सितंबर 2015

Maan ke Baat 20 September 2015

कहते है के लम्हे जितना क़म होता है प्यार उतना ही ज़्यादा होता है यदि मै और मेरा कोई अज़ीज दोस्त  कही अचानक भीड़ में मिल जाए तो ज्यादा खुशी होगी बजाय रोज मिलने पर  । तो जाहिर सी बात  है ज़्यादा मुलाकात अछी  नहीं है
आज तो कल से कुछ ज़्यादा की उम्मीद रख ली थी मैने जो इस कदर गवारा न था खुदा को
आज पीछै  देखता हु तो अपने आप को तकरीबन डेढ़ दो लाख के जमीनी कर्जे के नीचे अपने आप को पाता हु ।
और अपने आप मैं समय की घडी के चाल से मिलाना चाहता हु और सभी को यही कहता हु की में तुम सब को पीछे छोड़ दूंगा बजाय उन सभी के साथ चलने के |
अक्शर  दुनिया यही कहती है की " वफ़ा तो सिर्फ अपनो में होती है ". लेकिन मुझे तो लगा की " जितनी बेवफाई की बू मेरे अपनों में है शायद गैरो में कहा है " बफा तो सिर्फ हाथी के दांत की जैसी है वो तो सिर्फ दिखावट-दिखावट ही है
इस बनावटी दुनिया के दिखावटी लोगो से अक्शर अपने आप को दूर रखता हूँ इसी लिए तो पापा की पीढ़ी के लोगो के बीच में नहीं बोलता हूँ न जाने कोन वफ़ा के नाम पे  बेवफाई कर बैठे

























मन की बात 20 सितम्बर 2015